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संवेदनहीन सत्ता: क्या देश विनाश की ओर बढ़ रहा है?

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HS LIVE NEWS | विशेष संपादकीय

संवेदनहीन सत्ता: क्या देश विनाश की ओर बढ़ रहा है?

आज के समय में जिस तेजी से समाज में अन्याय, अत्याचार, अपराध और भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, वह किसी एक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का दुष्परिणाम है, जहाँ सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग जनता की पीड़ा, संवेदनाओं और अपने कर्तव्यों से विमुख होते जा रहे हैं।
जब सत्ता में बैठे लोग संवेदनहीन हो जाते हैं, तो शासन केवल नियमों का ढांचा बनकर रह जाता है, जिसमें जनता की आवाज, दर्द और अधिकारों का कोई मूल्य नहीं रह जाता। ऐसी संवेदनहीन सत्ता न केवल विश्वास को तोड़ती है, बल्कि धीरे-धीरे पूरे राष्ट्र को भीतर से खोखला कर देती है।
इतिहास बार-बार यह चेतावनी देता आया है कि जब भी सत्ता में अहंकार और अत्याचार बढ़ा है, तब उसका अंत विनाश में ही हुआ है। रावण, कंस, हिरण्यकश्यप और दुर्योधन जैसे शक्तिशाली शासकों ने अपनी शक्ति के मद में आकर धर्म और न्याय को ठुकराया, और अंततः स्वयं के साथ अपने वंश और साम्राज्य का भी विनाश कर बैठे।
इसके विपरीत, जहाँ शासन में संवेदनशीलता, धर्म और न्याय का समावेश रहा, वहाँ जनता ने सुख, शांति और समृद्धि का अनुभव किया। भगवान श्रीराम का रामराज्य, भगवान श्रीकृष्ण की नीति और धर्मराज युधिष्ठिर का न्यायपूर्ण शासन आज भी आदर्श के रूप में देखे जाते हैं, जहाँ शासक का पहला धर्म जनता की सेवा और सुरक्षा था।
वर्तमान समय में सबसे बड़ी चिंता यह है कि सत्ता की दौड़ में संवेदनशीलता कहीं पीछे छूटती जा रही है।
झूठ, फरेब, छल और स्वार्थ ने व्यवस्था को जकड़ लिया है।
जनता की समस्याएँ अनसुनी हो रही हैं और न्याय की प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं।
यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाला समय और भी भयावह हो सकता है, जहाँ जनता और सत्ता के बीच का विश्वास पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
🚨 अब समय है जागरूक होने का, सवाल पूछने का और बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाने का।
एण्टी करप्शन कोर (ACC) की अपील
एण्टी करप्शन कोर (ACC) देश के सभी जागरूक और बुद्धिजीवी नागरिकों से अपील करता है कि वे अन्याय, अत्याचार, अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों और एक संवेदनशील, न्यायपूर्ण और सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।
निष्कर्ष
👉 जहाँ सत्ता संवेदनशील होती है, वहाँ राष्ट्र मजबूत होता है।
👉 जहाँ सत्ता संवेदनहीन हो जाती है, वहाँ विनाश की शुरुआत हो जाती है।

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