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आईजीआरएस निस्तारण पर बड़ा विवाद एण्टी करप्शन कोर (एसीसी) ने जांच रिपोर्ट को बताया “फर्जी और मनगढ़ंत”

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🔴 HS LIVE NEWS | बड़ी खबर | सिस्टम पर गंभीर सवाल
आईजीआरएस निस्तारण पर बड़ा विवाद
एण्टी करप्शन कोर (एसीसी) ने जांच रिपोर्ट को बताया “फर्जी और मनगढ़ंत”
लखनऊ/गोरखपुर।
उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे महत्वपूर्ण जन-शिकायत प्रणाली आईजीआरएस पोर्टल की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर अब गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। भारत सरकार से मान्यता प्राप्त तथा उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए अधिकृत संगठन एण्टी करप्शन कोर (एसीसी) ने आरोप लगाया है कि उनकी शिकायत का निस्तारण पूरी तरह से मनगढ़ंत और तथ्यों से परे किया गया।
📌 क्या है पूरा मामला?
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री कमलेश ओझा की ओर से माननीय मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजा गया था, जिसमें कानून व्यवस्था से जुड़े आदेशों के अनुपालन में शासकीय अंगरक्षक एवं प्रोटोकॉल उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा इस पत्र को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कर संबंधित अधिकारियों को अग्रसारित किया गया।
लेकिन आरोप है कि गोरखपुर जनपद के गोला क्षेत्राधिकारी द्वारा जो जांच आख्या प्रस्तुत की गई, वह तथ्यों से बिल्कुल अलग और भ्रामक है।
⚠️ जांच रिपोर्ट पर गंभीर आरोप
एसीसी का कहना है कि—
जांच अधिकारी ने अपनी आख्या में यह लिखा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात कर पूछताछ की गई, जबकि ऐसी कोई मुलाकात हुई ही नहीं।
धमकी की शिकायत को “पुख्ता प्रमाण के अभाव” में निराधार बताया गया, जबकि इसकी सूचना स्थानीय स्तर पर पूर्व में दी जा चुकी थी।
शिकायत के मूल बिंदुओं पर गंभीरता से विचार किए बिना ही निस्तारण कर दिया गया।
संगठन का आरोप है कि इस प्रकार की कार्यवाही से न केवल शासन को भ्रमित किया गया, बल्कि मुख्यमंत्री की पारदर्शी व्यवस्था की मंशा पर भी आघात पहुंचा है।
❓ बड़ा सवाल
यदि एक अधिकृत भ्रष्टाचार विरोधी संगठन की शिकायत का निस्तारण इस तरह से किया जा सकता है, तो आम नागरिकों की शिकायतों की स्थिति क्या होगी?
क्या आईजीआरएस जैसी जन-कल्याणकारी व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर रह गई है?
🏛️ मुख्यमंत्री से कड़ी कार्रवाई की मांग
एसीसी ने माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि—
पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
संबंधित जांच अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जाए।
दोषी पाए जाने पर कठोर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
संगठन का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इससे शासन की छवि और जनता का भरोसा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
🔎 HS LIVE NEWS इस मामले की तह तक जाने के लिए लगातार प्रयासरत है।
हम जनता की आवाज को बुलंद करते रहेंगे।
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