यूजीसी के नए कानून के खिलाफ अधिवक्ताओं का उग्र आंदोलन
यूजीसी के नए कानून के खिलाफ अधिवक्ताओं का उग्र आंदोलन
रुद्रपुर तहसील देवरिया में गरजा अधिवक्ता समाज, सरकार को दी कड़ी चेतावनी
✍️ रिपोर्ट: HS Live News
देवरिया जनपद की रुद्रपुर तहसील उस समय आंदोलन का केंद्र बन गई जब यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए कानून के विरोध में अधिवक्ताओं ने ज़ोरदार और उग्र प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में एकत्र होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और इस कानून को शिक्षा व्यवस्था के लिए “घातक” बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। (HS Live News)
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं का आक्रोश साफ नजर आया। अधिवक्ताओं ने कहा कि यूजीसी का यह नया कानून न केवल शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता को समाप्त करेगा बल्कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों पर भी सीधा हमला है। यह कानून छात्रों, शिक्षकों और समाज के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
“यह कानून शिक्षा नहीं, नियंत्रण थोपने की साजिश” — अधिवक्ता
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सरकार शिक्षा को व्यवसाय बनाने पर आमादा है और यूजीसी का नया कानून उसी दिशा में एक खतरनाक कदम है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस कानून को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक फैलाया जाएगा। (HS Live News)
अधिवक्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर “यूजीसी कानून वापस लो”, “शिक्षा पर हमला बंद करो” जैसे नारों से तहसील परिसर को गुंजायमान कर दिया। प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए तहसील का कार्य भी प्रभावित रहा, जिससे आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रशासन सतर्क, आंदोलन रहा शांतिपूर्ण
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन मौके पर मौजूद रहा। हालांकि अधिवक्ताओं का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन उनके तेवर साफ तौर पर सरकार के प्रति नाराजगी को दर्शा रहे थे। (HS Live News)
प्रदर्शन के अंत में अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए यूजीसी के नए कानून को तत्काल निरस्त करने की मांग की। उन्होंने साफ कहा कि यह लड़ाई केवल अधिवक्ताओं की नहीं, बल्कि देश की शिक्षा, संविधान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है।