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बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा, शरीयतपुर में मॉब लिंचिंग की दिल दहला देने वाली कोशिश

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बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा, शरीयतपुर में मॉब लिंचिंग की दिल दहला देने वाली कोशिश

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है। एक बार फिर नफरत और कट्टरता ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। ताजा मामला बांग्लादेश के शरीयतपुर जिले से सामने आया है, जहां खोकन चंद्र नाम के एक हिंदू व्यक्ति को उग्र भीड़ ने घेरकर मौत के घाट उतारने की कोशिश की।
मिली जानकारी के अनुसार, अचानक जमा हुई भीड़ ने खोकन चंद्र को चारों ओर से घेर लिया और बिना किसी ठोस वजह के उस पर हमला बोल दिया। पहले उसे बेरहमी से पीटा गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बाद नफरत की सारी हदें पार करते हुए आरोपियों ने उस पर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश की। मौके पर मौजूद कुछ स्थानीय लोगों की सूझबूझ और हस्तक्षेप से किसी तरह उसकी जान बचाई जा सकी।
घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। हिंदू समुदाय में भय और असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है। पीड़ित खोकन चंद्र को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
यह घटना बांग्लादेश में लगातार सामने आ रही मॉब लिंचिंग और अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की कड़ी में एक और भयावह उदाहरण है। मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि धार्मिक पहचान के आधार पर की जा रही हिंसा में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर सख्त और प्रभावी कार्रवाई की कमी साफ दिखाई देती है।
इस मामले के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से भी बांग्लादेश में बढ़ रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है। संगठनों का कहना है कि बांग्लादेश सरकार को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कर उदाहरण पेश करना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते हालात पर काबू नहीं पाया गया, तो यह हिंसा देश की सामाजिक एकता और अंतरराष्ट्रीय छवि दोनों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। बांग्लादेश में धार्मिक सहिष्णुता और मानवाधिकारों की रक्षा अब सिर्फ आंतरिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक चिंता का विषय बनता जा रहा है।
फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और पीड़ित को न्याय दिलाने पर टिकी हुई हैं।

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