प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एकौना में डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर सवाल, मरीज परेशान
बड़ी खबर: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एकौना में डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर सवाल, मरीज परेशान
डॉक्टर के आने-जाने के समय को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी, मरीज झोलाछाप चिकित्सकों के भरोसे इलाज कराने को मजबूर होने का आरोप
देवरिया। जनपद देवरिया की ग्राम सभा एकौना स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं रहते, जिसके कारण इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद यदि समय से चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, तो गरीब और जरूरतमंद मरीज आखिर कहां जाएं। ऐसी स्थिति में मरीजों को स्थानीय स्तर पर निजी चिकित्सकों अथवा कथित झोलाछाप चिकित्सकों के पास जाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
शिकायत के बाद भी उठे निस्तारण पर सवाल
इस पूरे मामले को लेकर पूर्व में संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायती पत्र भी दिया गया था। आवेदक का आरोप है कि शिकायत का निस्तारण तो कर दिया गया, लेकिन शिकायत में उठाए गए निर्दिष्ट एवं महत्वपूर्ण बिंदुओं पर वास्तविक जांच अथवा स्पष्ट कार्रवाई नहीं की गई।
आवेदक का कहना है कि केवल कागजी स्तर पर शिकायत का निस्तारण कर देना और शिकायत में उठाए गए मूल सवालों की जांच नहीं करना, समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
आवेदक ने मांग की है कि शिकायत के निस्तारण की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाए तथा यह देखा जाए कि उसके द्वारा उठाए गए प्रत्येक बिंदु पर मौके पर जाकर निष्पक्ष जांच की गई थी या नहीं।
मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश के संकल्प पर भी सवाल
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई पर लगातार जोर दिया जाता रहा है। ऐसे में एक सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ी शिकायत का यदि बिना बिंदुवार जांच के निस्तारण किए जाने का आरोप सामने आता है, तो यह संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
आवेदक का कहना है कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी भ्रष्टाचार मुक्त और जवाबदेह उत्तर प्रदेश की बात करते हैं, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर शिकायतों का वास्तविक परीक्षण किए बिना निस्तारण किया जाता है, तो इससे सरकार की इस मंशा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अब उठ रहे हैं कई अहम सवाल
क्या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एकौना में चिकित्सक निर्धारित समय पर उपस्थित रहते हैं?
डॉक्टरों की उपस्थिति का रिकॉर्ड क्या कहता है?
शिकायत में उठाए गए प्रत्येक बिंदु की मौके पर जांच की गई या नहीं?
शिकायत का निस्तारण किस आधार पर किया गया?
क्या निस्तारण से पहले मरीजों और स्थानीय ग्रामीणों के बयान लिए गए?
क्या स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी स्वयं मौके का निरीक्षण करेंगे?
उच्चस्तरीय जांच की मांग
स्थानीय लोगों और आवेदक ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, देवरिया तथा स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एकौना का औचक निरीक्षण कराने की मांग की है।
साथ ही चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति पंजिका, ड्यूटी रोस्टर, ओपीडी रजिस्टर तथा उपलब्ध डिजिटल/बायोमेट्रिक उपस्थिति रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या शिकायत के कागजी निस्तारण तक ही मामला सीमित रहता है।
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